माँ के लिए दवाई लेने गया था, 14 साल बाद वापस लौटा

हमने हिंदी फिल्मों में कई बार इस सीन को देखा है कि कोई लड़का अपनी मां के लिए दवाई लेने निकलता है और फिर वहीं से वो गायब हो जाता है मां को उसके बारे में कुछ पता नहीं चलता और फिर वहीं लड़का अपनी माँ की आखों के सामने 14 साल बाद आता हैं। ये सब किसी फिल्मी सीन से कम नहीं लेकिन ये सब एक व्यक्ति की रीयल लाइफ में हुआ है।

दिल्ली के रहने वाले आमिर चंद 14 साल अपनी मां से दूर रहे उस गलती के लिए जो उन्होंने नहीं कि थी। बात 1998 की है जब दिल्ली-6 के आमिर चंद घर से अपनी मां की दवाई लेने के लिए निकले थे और तभी पुलिस ने उन्हें आतंकी समझ गिरफ्तार किया। उन पर कई तरह के केस लगे और उन्हें चौदह साल जेल में काटने पड़े।




आमिर ने मीडिया को दिए इंटरव्यू में बताया कि 20 फरवरी 1998 की रात 9 बजे घर से दवाई लेने के लिए निकले थे और तभी उन्हें सड़क पर बिना कुछ बताए कुछ लोगों ने किडनैप कर लिया। अंदर जाकर उनकी आंखें पट्टी से बांध दी और दोनों हाथों को बांध दिए। जब आमिर की आंख खोली गई तो उन्होंने खुद को एक छोटे से रूम में पाया जो जेल का था।

जिस समय उनके साथ ये सब हुआ तब आमिर की उम्र 18 साल की थी। जेल में जाने के कुछ समय बाद आमिर को पता चला कि दिल्ली में हुए बम ब्लास्ट के आरोप उन पर लगाए गए है। जेल में रहने के दौरान उनकी उम्र कम थी तो कुछ पढ़ाई भी की लेकिन आमिर के मुताबिक जेल में उन्हें एक ऐसे बंद कमरे में लगातार रखा गया जिसके उन्हें मेमोरी लॉस, ब्लड प्रेशर आदि बीमारी का सामना करना पड़ा।




आमिर का केस पहले दिल्ली में चल रहा था लेकिन बाद में उन्हें गाजियाबाद ट्रांसफर किया गया। गाजियाबाद में उनका केस किसी भी वकील ने लेने से इनकार कर दिया। लेकिन आमिर ने हिम्मत नहीं हारी। उन्हें पूरा भरोसा था कि एक दिन उन्हें निर्दोष करार करके छोड़ा जाएगा।

आमिर का केस लड़ने वाले एडवोकेट फिरोज़ खान ग़ाज़ी ने बताया कि ‘‘जरा सोचिए… उम्र 18 और केस की संख्या 19… फिर भी आमिर के चेहरे पर हमेशा हमने एक यकीन देखा, यह यकीन कानून पर भरोसे का है। देश में मिलने वाले इंसाफ का है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस ने हर मामले में झूठें गवाह पेश किए और हमें इन गवाहों में एक ऐसा गवाह मिला जिसने केस को आसान बनाया।




12 जनवरी 2012 को उन्हें जेल से रिहा किया गया। उन्होंने बताया कि जब वे जेल से बाहर निकले थे तब बाहर की पूरी दुनिया उनके लिए एक नई दुनिया थी। बाहर निकलते ही वो बस स्टेशन की ओर गए। बस में पास ही में एक छोटा सा बच्चा अपनी मां की गोद में था। उसे देखकर उन्हें लगा कि वो किसी दूसरी दुनिया में आ गए हैं।

आमिर के साथ जेल में किस तरह की यातनाएं हुई और उन्हें किस गलती की ये सज़ा मिली ये तो आप इस कहानी को पढ़कर जान ही गए होंगे। आमिर ने अपनी ज़िन्दगी में हुई इस घटना को किताब के रूप में भी पेश किया है जिसका शीर्षक ‘फ्रेम्ड एज ए टेररस्टि’ ( Framed as a terrorist ) । उन्होंने कई मीडिया चैनल को इंटरव्यू देकर अपने बारे में भी बताया है और आजकल वे मानव अधिकारों से जुड़े एक एनजीओ के साथ काम कर रहे हैं।

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