इंजीनियरिंग छोड़कर पॉलिश किए जूते, ऐसे बना करोड़पति

sachin gajkas

कहते हैं जिन्दगी हर वक्त इंसान का इम्तहान लेती है। इस इम्तहान को जो पास कर जाता है वो सफलता की एक नई कहानी बना देता है। हालांकि शुरुआत में भले ही अपनी मंजिल को पाने में मुश्किलें आती है लेकिन दृढ़ निश्चय और आत्मविश्वास के बल पर हर मुश्किल को पार किया जा सकता है। आज हम आपको एक ऐसे व्यक्ति की सफलता की कहानी बताने जा रहे हैं जिसे पढ़कर आपको अपने सपनों को पूरा करने की प्रेरणा मिलेगी।




ये कहानी एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रख़ने वाले संदीप गजकस की है। जिन्होंने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई नेशनल इंस्टीट्युट ऑफ फायरिंग से की। पढ़ाई पूरी करने के बाद संदीप ने अपने सपनों को पूरा करने के लिए विदेश जाने का फ़ैसला किया लेकिन इसी बीच अमेरिका में हुए एक आतंकी हमले ने उनके फ़ैसले को बदल दिया।

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संदीप वह शख़्स है जो अपनी शानोशौकत छोड़कर छोटा-मोटा काम करने लगे तो ये बात सुनने में थोड़ी अजीब लगती है लेकिन सच यही है कि संदीप अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़कर जूते पॉलिश करने लगे। इतना ही नहीं आज उनके उसी काम की बदौलत वह करोड़पति बन चुके हैं।

यहां से  शुरू हुई कहानी
संदीप विदेश की नौकरी छोड़ अपने घर लौट आए। घर की आर्थिक स्थिती को देखते हुए ऐसा बिज़नेस शुरू करने का फैसला किया जिसमें कम इनवेस्टमेंट मगर अच्छी इनकम हो जाऐ। काफी सोच विचार करने के बाद संदीप ने शू पॉलिश का काम करने का फैसला किया।

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सबने बनाया मज़ाक
जब अपने इस बिज़नेस का आइडिया संदीप ने सबको बताया तो सबने उनका खुब मज़ाक उड़ाया जिसमें संदीप के घरवाले और दोस्त भी शामिल थे लेकिन संदीप ने हार नहीं मानी और अपना काम करते रहे। कुछ महिनों तक शू पॉलिशींग करने के बाद पूराने जूतों को रिनोवेट करने का एक नया आइडिया आया। इसी तरह 2003 में देश की पहली शू लॉड्री कंपनी खोली। उन्हे 50 ऑर्डर प्रतिदिन की दर पर प्राप्त होते थे जिसमें वे लोगों के लिए पिकअप और डिलीवरी का भी काम करने लगे।




नुकसान होते हुए भी नहीं की कंपनी बंद
संदीप ने बताया जूता रिपेयर करने और साफ करने तक की महज़ फीस 99 रूपये होती थी। पिकअप और डिलीवरी खर्च मिलाकर 150 रूपये से भी ज्यादा चला जाता था लेकिन संदीप को अपने यूनिक बिज़नेस आइडिया पर इतना विश्वास था कि 20 लाख के नुकसान में भी वह बिज़नेस चलाते रहे।

विदेशों में बनाई अपनी पहचान
वही अब तक संदीप की कंपनी देश के कई राज्यों में फेमस हो गई थी। इतना ही नहीं केन्या, भूटान  जैसे देशों में भी संदीप की कंपनी की गुडविल काफी अच्छी बन गई। नाइक, रिबोक, पुमा, फिला जैसी कई बड़ी कंपनियां आज संदीप की कम्पनी से जुड़ी हैं। मुम्बई के अंधेरी से शुरू हुई ये कहानी देश से दुनिया तक कब पहुची ये वे खुद भी नहीं जान पाए। दुनिया वालों के उपहास बनाने पर भी संदीप ने वहीं किया जो उन्हे सही लगा। संदीप ने अपने दिल की सुनी और आज़ सफलता उनके कदम चूम रही है।

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