कॉर्पोरेट करियर छोड़, दूध बेच कर कमाएं 120 करोड़ रुपए

shrikumar misra

कृषि प्रधान देश होने के बावजूद आज हमारे देश के ज्यादातर युवा इससे दूर है। तकनीकि क्रांति होने की वजह से हमारे देश की युवा पीढ़ी का रुझान कृषि से हटकर दूसरे क्षेत्रों की तरफ जा रहा है। लेकिन हमारे समाज में इन्हीं युवाओं के बीच कुछ ऐसे प्रभावशाली युवा भी है जिन्होंने अपनी अच्छी-खासी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ कृषि में हमारे देश के युवाओं के सोच से उलट ओडिशा के इस युवा ने अपनी कॉर्पोरेट करियर को छोड़ कर कृषि के अपनाया है और आज वह सफलता के पायदान पर पहुंच चुके है।

टाटा ग्रुप की नौकरी छोढ़ किया अपना बिजनेस
जी हां आज हम जिस युवा की बात कर रहे है वह और कोई नहीं बल्कि ओडिशा के कटक में एक मध्यम-वर्गीय परिवार में पैदा हुए श्रीकुमार मिश्रा की हैं। जिन्होंने अपनी स्कूली और कॉलेज स्तर की पढ़ाई पूरी करने के बाद भुवनेश्वर के प्रतिष्ठित जेवियर इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट से एमबीए की पढ़ाई पूरी की। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वह टाटा समूह में नौकरी लग गई। श्रीकुमार वही है जिन्होंने टाटा समूह के साथ काम करते हुए अपने आठ साल के करियर में टेटली समूह के टाटा द्वारा अधिग्रहण में महत्वपूर्ण भूमिका  निभाई थी।




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ऐसे स्टार्ट किया ’मिल्क मंत्रा’
ओडिशा में रह कर लोगों की मौजूदा समस्याओं को दूर करने के लिए कारोबार की शुरुआत करने में विश्वास रखने वाले श्रीकुमार ने हमेशा अपने आस-पास की परिस्थिति को गहराई से अध्ययन किया। इस दौरान उन्हें अपने राज्य में दूध की अपार कमी महसूस हुई। इसी कमी को दूर करने के लिए श्रीकुमार को यह एक बड़ा करोबारी अवसर दिखाई दिया। और फिर शुरु किया देश की पहली कृषि समर्थित स्टार्टअप ’मिल्क मंत्रा’ के नाम से दूध का स्टार्टअप। इस स्टार्टअप की आधारशिला 2009 में रखी।




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अनुभव का इस्तेमाल कर खड़ी की 120 करोड़ की कंपनी
श्रीकुमार ने कॉर्पोरेट के तजुर्बे का बखुबी इस्तेमाल करते हुए इन्होंने देश में विशेष कर ओडिशा में किसानों के स्थायी नेटवर्क की मदद से एक शुद्ध और स्वस्थ डेयरी उत्पादों के ब्रांड बनाने की प्रकिया शुरु की। यह आइडिया इतना प्रभावशाली था कि कुछ ही महीनों में इन्होंने कई निवेशकों को आकर्षित करते हुए अपने स्टार्टअप ’मिल्क मंत्रा’ को एक नई ऊंचाई पर बिठा दिया।

पहले ही साल में इन्होंने 18 करोड़ का रेवेन्यु कमा कर बाज़ार में मौजूद अन्य ब्रांड को कडी टक्कर दी। इसके बाद उन्होंनं साल 2011 में अपनी खुद की तीन-परत पैकेजिंग प्रणाली विकसित कर ली थी। जिसके वजह से प्रकाश द्वारा दूध सामग्री को होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है। साल 2012 में श्रीकुमार की कंपनी ने डायरेक्ट-टू-होम डिलीवरी दूध की शुरुआत की ।




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40 हज़ार किसान से जुड़ा है मिल्क मंत्रा
आज 21वीं सदी में एक स्वेत क्रांति को जन्म देते हुए श्रीकुमार ने मिल्क मंत्रा के बैनर तले करीब 40 हजार किसानों को एकजुट कर रखा है। मिल्क मंत्रा की इतने कम समय में इतनी बड़ी उपलब्धि पर अध्ययन करने के लिए रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन खुद कंपनी जाकर इसके बारे में जानकारी जुटाई। आज कंपनी के साथ दुध व्यवसाय से जुड़े डेरी उत्पादों को करोड़ो ग्राहकों तक पंहुचा रही है। कंपनी जल्द ही झारखण्ड और कर्नाटक में भी प्रोडक्ट को लांच करने की तैयारी में है।



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