शशिकला का मुख्यमंत्री बनने का सपना हुआ चकनाचूर; आय से अधिक संपत्ति मामले में दोषी करार, 4 साल की हुई जेल

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नई दिल्ली/चेन्नई : उच्चतम न्यायालय ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में अन्नाद्रमुक प्रमुख वी के शशिकला की दोषसिद्धि को मंगलवार को फिर बहाल कर उन्हें वापस जेल भेजने का निर्देश दिया जिससे उनकी तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने की योजना खटाई में पड़ गयी। इस घटनाक्रम से राज्य के सत्तारूढ़ दल में सत्ता को लेकर एक नई जंग छिड़ गयी। उच्चतम न्यायालय ने 19 साल पुराने और जे जयललिता की सहभागिता वाले इस मामले में दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता की करीबी रह चुकी 60 वर्षीय शशिकला को तुरंत आत्मसमर्पण करने और अपनी चार वर्ष की सजा की शेष अवधि काटने को कहा है। उन्होंने बेंगलूरू जेल में पहले ही छह माह की सजा की अवधि काटी थी।




स बात को लेकर अभी कोई बयान नहीं आया है कि जयलिलता के साथ षड्यंत्र रचाने की दोषी पायी गयी शशिकला कब आत्मसमर्पण करेंगी। दोष सिद्धि के कारण शशिकला अब करीब 10 साल तक चुनाव और कोई सरकारी पद हासिल नहीं कर पाएंगी।

शशिकाला के करीबी इडाप्पडी के पलानीस्वामी को विधायक दल का नेता चुना गया है और माना जा रहा है कि इसका मकसद उन्हें अगले मुख्यमंत्री के रूप में पेश करना है। इसी के साथ कार्यवाहक मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से हटा दिया गया है। पार्टी के दो परस्पर विरोधी धड़ों के बीच ‘तू डाल डाल मैं पात वाली’ रणनीति चल रही हैं।

पलानीस्वामी (63) ने तुरत-फुरत कार्रवाई करते हुए राज्यपाल विद्यासागर राव से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया। उधर, पनीरसेल्वम ने शशिकला धड़े के सदस्यों से मार्मिक अपील करते हुए कहा कि वे अम्मा (जयललिता) की सरकार को आगे बढ़ाने के लिए अपनी अंतररात्मा की आवाज को सुने।

पलानीस्वामी ने अपने समर्थक विधायकों का समर्थन पत्र राज्यपाल को सौंपा जिन्होंने चेन्नई के समीप रिजार्ट में उन्हें चुना था।

भले ही अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि विधायक दल की बैठक में कितने विधायकों ने हिस्सा लिया, किन्तु मद्रास उच्च न्यायालय को कल राज्य अभियोजक द्वारा सूचित किया गया था कि 119 अन्नाद्रमुक विधायक अपनी इच्छा से रिजार्ट में रह रहे हैं। 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में अन्नाद्रमुक के 134 विधायक हैं।

उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में बेंगलूरू की सुनवाई अदालत के फैसले को पूर्ण रूप से बहाल कर दिया है। उस फैसले में चारों अभियुक्तों.. जयललिता, शशिकला तथा शशिकला के दो रिश्तेदारों वी एन सुधाकरन एवं इलावर्सी को दोषी ठहराते हुए उन्हें जेल भेजने को कहा गया है। न्यायमूर्ति पी सी घोष एवं न्यायमूर्ति अमिताव राव की दो सदस्यीय पीठ ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को पूरी तरह पलट दिया जिसमें चारों दोषियों को बरी कर दिया गया था। पीठ ने कहा कि शशिकला और दो रिश्तेदार बेंगलूर की सुनवाई अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करें और चार साल की जेल की शेष अवधि को काटे।

शशिकला चेन्नई से 80 किमी दूर कोवत्थूर के एक रिसार्ट में रूकी जहां पिछले कुछ दिनों से उनके समर्थक विधायक डेरा डाले हुए हैं।

इस फैसले के कारण शशिकला विधायक बनने से अयोग्य हो गयी हैं। इसके परिणामस्वरूप जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत वह जेल से रिहा होने की तिथि के छह साल बाद तक मुख्यमंत्री नहीं बन सकेंगी।




पीठ ने इस बड़े निर्णय का केवल वही अंश पढ़ा जो प्रभावी है। उसने कहा, ‘रिकार्ड पर रखी गयी सामग्री एवं साक्ष्य के आधार पर हम उच्च न्यायालय के फैसले को दरकिनार करते हैं तथा आरोपी लोगों को दोषी साबित करने के सुनवाई अदालत के निर्णय की पूर्ण रूपेण पुष्टि करते हैं।’ पीठ ने कहा कि चूंकि जयललिता का निधन हो चुका है, उनके खिलाफ कार्यवाही को बंद किया जाता है। उनका निधन पांच दिसंबर को हुआ।

उसने कहा, ‘बहरहाल, हम तथ्यों का सम्मान करते हुए कह रहे हैं कि सुनवाई अदालत द्वारा उनके खिलाफ तय किये गये आरोप बहाल किये जा रहे हैं।’

शीर्ष न्यायालय ने अपना फैसला आठ मिनट तक सुनाया। फैसला सुनाने से पहले न्यायमूर्ति घोष ने कहा, ‘आप समझ सकते हैं कि (यह) बहुत भारी भरकम फैसला है। हमने बोझ वहन किया है।’ शशिकला के करीबी और अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ सांसद थम्बीदुरै ने कहा कि वह निर्णय के खिलाफ अपील करेंगे।

बेंगलुरु की सुनवाई अदालत ने शशिकला और उनके दो संबंधियों को चार साल की सजा सुनाते हुए उन पर 10-10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था जबकि जयललिता को चार साल की जेल के साथ 100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था।

इस बीच, माना जा रहा है कि तमिलनाडु के राज्यपाल नई सरकार के गठन के बारे में कोई भी फैसला लेने से पहले सोली सोराबजी सहित तीन कानूनी विशेषज्ञों की सलाह पर गौर करने के बाद करेंगे। राज्यपाल ने इस मामले में एटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी एवं पूर्व सालीसिटर जनरल मोहन पारासरन से भी कानूनी सलाह मांगी है।

एक अधिकारी ने बताया, ‘उम्मीद है कि राज्यपाल तीन कानूनी विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर कोई निर्णय कर सकते हैं।’




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